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Thursday, 14 November 2019

विनम्र श्रद्धांजलि और श्रद्धा सुमन अर्पित हैं।


आपकी पहचान के लिये आपका नाम ही काफ़ी है

 डाक्टर वशिष्ठ नारायण सिंह।

बिहार के पुत्र, दुनिया के जाने माने महान गणितज्ञ,होनहार,

प्रतिभा के धनी,बचपन से ही शांत व गंभीर स्वभाव के धनी,विश्व गणित कांग्रेस अमेरिका में भारत का सर ऊंचा उठाने वाले,एक सामान्य परिवार में जन्म हुआ था आपका

परन्तु आप सदैव ही न जाने क्यों सरकार की तरफ से उपेक्षित होते  रहे |

जब आप पटना विज्ञान महाविद्यालय में पढ़ते थे 

 आपकी मुलाकात अमेरिका से पटना आये प्रोफेसर कैली से हुई आपकी प्रतिभा से प्रभावित होकर प्रोफेसर कैली ने आपको  बरकली आकर शोध करने का निमंत्रण दिया।१९६३ में आप कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय में शोध के लिये गये। १९६९ में आपने कैलीफोर्निया विश्वविघालय में पीएच.डी. की डिग्री प्राप्त की। चक्रीय सदिश समष्टि सिद्धांत पर किये गये आपके शोध कार्य ने आपको भारत और विश्व में प्रसिद्ध कर दिया।

आपने  वाशिंगटन में गणित प्रोफेसर के पद पर भी काम किया। 

१९७१ में आप भारत वापस लौट आये। आपने भारतीय प्रौद्योगिकी  संस्थान कानपुर और भारतीय सांख्यकीय संस्थान  कोलकाता में काम किया।१९७३ में आपका विवाह वन्दना रानी के साथ हुआ। १९७४ से आपको मानसिक दौरे आने लगे। आपका राँची में इलाज हुआ। लम्बे समय तक आप मानसिक पीड़ा के साथ गाएब रहे फिर एकाएक आप हमें मिल गये। आपको बिहार सरकार ने इलाज के लिये बेंगलुरू भेजा था लेकिन बाद में  बीमारी  का ख़र्च देना सरकार ने बंद कर दिया। इससे बड़ी सरकारी निर्ममता की मिशाल  ढूंढ़ना मेरे लिये सायद बहुत मुश्किल है। जनदबाव में एक बार फिर से बिहार सरकार ने आपके  इलाज के लिये  पहल की थी। विधान परिषद की आश्वासन समिति ने १२  फ़रवरी २००९ को पटना में हुई अपनी बैठक में आप को इलाज के लिये दिल्ली भेजने का निर्णय लिया।

 समिति के फैसले के आलोक में भोजपुर जिला प्रशासन ने आपको  १२  अप्रैल २००९  को दिल्ली भेजा।आपके साथ दो डॉक्टर भी भेजे गये थे। दिल्ली के मेंटल अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों के परामर्श पर आपके  लिये आगे के ख़र्च का बंदोबस्त किया गया।

स्वास्थ्य विभाग का कहना था कि दिल्ली में परामर्श

 के बाद यदि ज़रूरत पड़ी तो उन्हें विदेश भी ले जाया जा सकता है।

 पिछले दिनों आरा में आपकी आंखों में मोतियाबिन्द का सफल ऑपरेशन हुआ था। कई संस्थाओं ने आपको गोद लेने की पेशकश की थी लेकिन आपकी माता जी को यह मंज़ूर नहीं था।

आज १४ नवंबर  २०१९ को देश की महान प्रतिभा,

 बिहार की विभूति, महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन हो गया है। आप अपने परिजनों के संग पटना के कुल्हरिया कॉपलेक्स में रहते थे। बताया जा रहा है कि आज आपकी  तबियत ख़राब होने लगी, जिसके बाद तत्काल परिजन पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल लेकर गये।जहां डॉक्टरों ने आपको  मृत घोषित कर दिया ।सोशल मीडिया पर समाचार मिले हैं कि आपके शव को घर ले जाने के लिये मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा एंबुलेंस भी उपलब्ध नहीं करायी गयी। एक अभागे महान वैज्ञानिक के शव को अंत में घोर सरकारी उपेक्षा और नकारेपन का शिकार होना पड़ा।

अफ़सोस!

हमारी विनम्र श्रद्धांजलि और श्रद्धा सुमन अर्पित हैं।

© अनीता सैनी


तुम्हारी फुलिया

  " सां सों के चलने मात्र से झुलसता है क्या पीड़ा से हृदय?" फुलिया अपनी गाय गौरी का माथा सहलाते हुए पूछती है।   "तुम्ह...