Friday, 20 March 2020

एक नन्ही गौरैया

"गौरैया का घोंसला, नन्हे-नन्हे तिनके, पेड़-पौधे, झाड़ियाँ, झूलतीं टहनियाँ, चिड़िया के अंडे, चूजे, मधुर चहचहाट  अब बच्चों की चर्चा से दूर हो रहे हैं।"

कहते हुए सरिता जी साथी शिक्षकों से गौरैया के विलुप्त होने की चर्चा कर रही  थी, आज विश्व गौरैया दिवस पर वृक्षारोपण करते हुए, पौधों में पानी डालते हुए, गौरैया के विलुप्त होने की करुण कथा पर काफ़ी ज़िक्र हुआ। यह सुनकर छात्र-छात्राओं का मन द्रवित हो गया।

"इंसान अपने स्वार्थ में इतना अँधा हो गया है कि बिना सोचे-समझे प्रकृति का शत्रु बनता जा रहा है। पशु-पक्षियों का आवास अबाध गति से नष्ट करने में लगा है मानव। पक्षियों को अपना घोंसला बनाने के लिये पेड़ चाहिए जो दूर-दूर तक नज़र नहीं आ रहे हैं तो फिर अंडे सेने के लिये गौरैया को कहाँ जाना पड़ा होगा....? कुछ सोचिए!"

कहते-कहते  सरिता जी बहुत भावुक हो गयीं। उन्होंने विनाश का कारण रेडिएशन को बताया और एक कहानी सुनायी-

गौरैया बार-बार चोंच से टॉवर पर प्रहार कर उसे  गिराने का प्रयास करती है। कुछ देर ठहर वह पुनः प्रयास करती है।सुबह से शाम होने को आयी परंतु वह अपने कार्य को पूर्ण श्रद्धा के साथ करती नज़र आयी।यह दृश्य देख वहाँ अन्य पक्षी पहुँच जाते हैं।

"बहन क्या  कर रही हो मैं देख रही हूँ  तुम काफ़ी देर से इस टॉवर को गिराने का प्रयास कर रही हो। "

एक अन्य गौरैया उस गौरैया के पास आती है और उससे उत्सुकता भरी निगाहों से पूछती है।

"हाँ सखी इस टॉवर ने मेरे बच्चों की ज़िंदगी निगल ली अब मैं इसे गिराकर ही दम लूँगी।"

वह गौरैया फिर प्रयास करती है जैसे ही अपना घोंसला बनाने, दाना चुगने के बाद  फ्री होती उसी टॉवर को चोंच से ठोकने लगती।

काफ़ी दिनों तक यही क्रम चलता रहा। टॉवर है कि टस से मस नहीं हुआ। धीरे-धीरे उस गौरैया की सेहत बिगड़ने लगी। अब वह दाना  चुगने भी नहीं जाती थी। फिर एक दिन उसकी साथी गौरैया उसे बुलाने आयी।

"बहन ऐसे कितने दिनों तक चलेगा, चलो अब खाने की तलाश में चलते हैं।"

साथी गौरैया उसकी हिम्मत बँधाती है और एक नज़र उसके घोंसले पर डालती है तथा देखती है कि अभी तक अंडों से बच्चे बाहर नहीं आये। क्या सच में रेडिएशन की वजह से हमारा  प्रजनन प्रभावित हुआ है। इसी विचार के साथ वह वहाँ से चली जाती है

लेकिन जैसे ही वह कुछ दिनों बाद लौटती है वह टॉवर उसे वहाँ नहीं मिलता और वह साथी चिड़िया अपने बच्चों के साथ उस घोंसले में उसे मृत मिलती है। अब उसे यकीन हो गया कि उसने टॉवर गिराते-गिराते अपनी जान गँवा दी

सभी के चेहरे पर उस चिड़िया के प्रति सहानुभूति  झलक रहा थी।

तभी चौथी कक्षा की एक बच्ची मासूमियत से बोलती है।

"मैम यह तो ऋतिक के घर की कहानी है उसके बड़े भाई को कुछ हो गया था तब उसके मम्मी-पापा ने उनकी छत पर लगा टॉवर हटवा दिया था।"

अब सभी बच्चों के पास कुछ न कुछ सवाल थे रेडिएशन को लेकर।

" मैम हम भी मर जाएँगे चिड़िया की तरह।" 

फिर एक बच्चे की आवाज़ गूँजी।

सरिता जी की आँखें मासूम सवाल पर छलक आयीं  और फिर बच्चे की मासूमीयत पर मुस्कुरायीं।

©अनीता सैनी  


11 comments:

  1. ' भी मर जायेंगे चिड़िया की तरह ' सच है मासूम का ये असुरक्षा भाव | ------इन्सान की भौतिकवादी प्रवृति की सजा मासूम अबोले प्राणियों ने सबसे अधिक पायी है | संवेदनाओं से भरा मार्मिक प्रसंग प्रिय अनिता |

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    1. सादर आभार आदरणीय रेणु दीदी सारगर्भित समीक्षा हेतु.
      सादर

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  2. दिवस को सार्थक करती मार्मिक पोस्ट।

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    1. सादर आभार आदरणीय सर सुंदर समीक्षा हेतु.
      सादर

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  3. गौरैया दिवस पर सटीक सार्थक सृजन...
    सही कहा हमारी अति से गौरैया विलुप्त हो रही है और भी कितनी ही तरह की भयावहता बढ़ रही है ये सब जानकर भी कोई कुछ सुधार नहीं रहा....
    शिक्षाप्रद प्रसंग के साथ सार्थक लेख।

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    1. सादर आभार आदरणीया दीदी सुंदर समीक्षा हेतु.
      सादर स्नेह

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  4. गौरैया की ऐसी मार्मिक कारुणिक कथा पढ़कर किसी भी संवेदनशील हृदय का द्रवित हो जाना लाज़मी है। मनुष्य का प्रकृति के साथ खिलवाड़ और भयानक चुनौतियों की लगातार अनदेखी आज गौरैया जैसे मासूम जीव को संरक्षित जीव की श्रेणी तक पहुँचाने की ज़िम्मेदार है।
    एक प्रेरक एवं उद्देश्यपूर्ण लघुकथा जो हमें प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाती है।



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    1. सादर आभार आदरणीय सर सुंदर सारगर्भित समीक्षा हेतु.
      आशीर्वाद बनायें रखे.
      सादर

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  5. अनीता जी ,आपकी इस मार्मिक कहानी को पढ़कर शायद कोई एक हृदय भी गौरेया को बचाने को लग जाए तो आपका लेखन सार्थक हो जाए ,दिल्ली में तो नहीं हाँ मुंबई में मैं जहाँ रहती हूँ वहां गौरेया दिखती हैं और मैं उनके लिए रोज रात में ही खिड़की पर ही दाने डाल देती हूँ और सुबह उनकी चहचाहट से ही मेरी नीद खुलती हैं बड़ी ही सुखद अनुभूति होती हैं ,भावपूर्ण कहानी ,सादर स्नेह

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    1. सादर आभार आदरणीय दीदी सुंदर सारगर्भित समीक्षा हेतु.
      स्नेह आशीर्वाद बनायें रखे.
      सादर

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  6. बहुत सुन्दर।
    घर मे ही रहिए, स्वस्थ रहें।
    कोरोना से बचें।
    भारतीय नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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